
सब कहते तो है कि लड़की है
ये क्या लडको से बराबरी करेगी
उनको को समझाए कि ये लड़की ही
परिवार में लडको का सुख भरेगी
पता नहीं लोग क्यों उस लड़की को
अपने सपनों से दूर रख रही होती है
ना जाने तब ये दुनिया कहा जाते है जब
हर दूसरे दिन एक लड़की की चीख गूंज रही होती है
अपनी बहन को कपड़े छोटे पहने के लिए मना करने वाले
दूसरों की बहनों के जिस्म नुमाइश करते है
वो गलती लड़कियों के कपड़ों की नहीं लडको के सोच की है
जो लड़की की चीख को अपनी मर्दानगी समझते हैं
याद करो उस लड़की क्या किस्मत
जिसके घर में ही हैवान रहता
क्या गलती थी उस छोटी बच्ची की
क्या उन हैवान के दिल में इंसानियत का एक कतरा तक ना बहता